प्रसिद्ध विचारक द्वेनमार्क एक दिन अपने पडोसी के घर गए। बोले-'मुझे एक पुस्तक की जरू रत है। पता चला कि वह आपके पास है। मुझे पढने के लिए दें।' पडोसी ने कहा- 'तुमने ठीक ही सुना है, वह पुस्तक मेरे पास है, किन्तु क्षमा करो, उसे मैं पढने के लिए घर नहीं ले जाने दूंगा। अगर चाहो तो यहीं पढ सकते हो।' बहुत अनुरोध करने पर भी उसने पुस्तक घर ले जाने की इजाजत नहीं दी। मार्क निराश होकर लौट गए। पांच-सात दिन बाद पडोसी सुबह-सुबह मार्क के दरवाजे पर हाजिर हुआ और बडे संकोच के साथ बोला- 'मुझे कुछ देर के लिए अपना झाडू देने की कृपा करें।'मार्क ने कहा-'जरूर, क्यों नहीं, किन्तु झाडू आप घर नहीं ले जा सकते। चाहें तो यहीं मेरे घर में उसका उपयोग कर लें।' यह है प्रतिक्रियात्मक हिंसा। आज समाज में यह प्रतिक्रियात्मक हिंसा ज्यादा है। इस तरह की हिंसा को जन्म दे रहे हैं आज के तथाकथित बडे लोग। इसीलिए आज सबसे बडी आवश्यकता है समाज का दृष्टिकोण बदलें। हमें समाज के सामने एक नया दर्शन प्रस्तुत करना है।
About Me
- gyanastro
- Pt. Gyan is a Spiritual Astrologer. He is providing services to mankind using our traditional and specific Indian Sanatan Vedic astrology. Your Welcome Cell: 09453 323131




0 comments